जयपुर (विनोद मित्तल).शिक्षा विभाग ने 22 साल पहले जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के पदों पर सीधी भर्ती के लिए नियम-कायदे तय किए थे। लेकिन विभाग आज तक एक बार भी इन पदों पर सीधी भर्ती नहीं कर पाया है। सरकार अब इन पदों पर सीधी भर्ती के नियम को ही समाप्त करने की तैयारी में है। इस नियम के चलते विभाग में डीईओ के पद खाली पड़े हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था गड़बड़ा रही है। बिना भर्ती किए किसी भर्ती की प्रक्रिया को रद्द करने का शिक्षा विभाग में संभवत: यह पहला मामला है। जिला शिक्षा अधिकारी के वर्तमान में 456 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 225 से अधिक पद खाली पड़े हैं।

प्रमोशन से भरे जाने थे खाली पद

सरकार ने इन पदों को प्रमोशन से भरने के लिए मामला वित्त विभाग में भेजा था। लेकिन वित्त विभाग ने फाइल यह कहते हुए लौटा दी थी कि पहले खाली पदों में से आधों पर सीधी भर्ती की जाए। इसके बाद प्रमोशन की अनुमति मिलेगी। इस कारण इन पदों को भरने का मामला अटक गया था। अब सरकार के सामने केवल दो ही विकल्प हैं। या तो आधे पद सीधी भर्ती से भरे जाएं, (जिसके लिए सरकार तैयार नहीं है)। या फिर इस नियम को ही समाप्त कर दिया जाए। सरकार दूसरे विकल्प पर उच्च स्तर पर मंथन कर रही है। अगर जल्दी ही इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ और वित्त विभाग से प्रमोशन की अनुमति नहीं मिली तो प्रदेश में गिनती के डीईओ रह जाएंगे।

50% सीधी भर्ती और 50% प्रमोशन से भरे जाने थे पद

राज्य सरकार ने वर्ष 1998 में जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर सीधी भर्ती के प्रावधान तय किए थे। इन प्रावधानों के अनुसार डीईओ के कुल पदों के 50 फीसदी पद सीधी भर्ती और 50 प्रतिशत पद प्रमोशन से भरने का नियम बनाया गया था। सीधी भर्ती के लिए योग्यताएं भी तय कर दी गई थी। लेकिन भर्ती कभी नहीं हुई।

दो बार भाजपा सरकार ने दी पद भरने की छूट

भाजपा सरकार ने तीन साल पहले सीधी भर्ती के पदों को प्रमोशन से भरने की छूट दी थी। तब डीईओ के कुल 142 पद थे। शिथिलता से वर्षों से खाली पड़े 71 पद भरे गए। लेकिन 2018 में सरकार ने प्रदेश में डीईओ के पदों की संख्या बढ़ाकर 456 कर दी। इनमें से 228 पद प्रमोशन से और 228 सीधी भर्ती से भरे जाने चाहिए। तत्कालीन सरकार ने दूसरी बार शिथिलता देकर सभी पद भर दिए थे। अब कांग्रेस सरकार नियमों में शिथिलता नहीं दे रही।

खाली पदों से ये हैं नुकसान

डीईओ के खाली पदों के चलते स्कूलों की मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही है। कई ब्लॉकों में शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा। वित्त विभाग अगर मंजूरी नहीं देता है तो शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले डीईओ गिनती के रह जाएंगे। इससे शिक्षा विभाग की व्यवस्था चरमराने की स्थिति में आ जाएगी।


Rules made for District Education Officer 22 years ago, now preparation to cancel the process without recruitment




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