मुजफ्फरपुर.बालिका गृह की पीड़ित 15 बच्चियाें के घर का पता समाज कल्याण विभाग अबतक नहीं तलाश पाया है। विभाग का मानना है कि मानसिक रूप से कमजोर ये बच्चियां ही घर का पता बताएंगी। इसके लिए बेंगलुरु की संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूराे साइंस के एक्सपर्ट अाैर टिस की टीम बच्चियाें की काउंसिलिंग कर रही है।

अभिभावकों से किया जाएगा संपर्क

विभाग के निदेशक राज कुमार ने गुरुवार को बताया कि काउंसिलिंग में बच्चियाें के घर का पता चलते ही उनके अभिभावकाें से संपर्क साधा जाएगा। अंगूठे और इलेक्ट्राॅनिक डिवाइस से भी इनके आवासीय पता की जानकारी लेने की काेशिश की गई, लेकिन इनका अाधार कार्ड बना ही नहीं था। उन्हाेंने बताया कि इससे पहले तीन महीने के अंदर अलग-अलग तिथियाें में बालिका गृह की 19 बच्चियाें काे उनके अभिभावकाें काे साैंपा गया है। 10 फरवरी काे पंजाब की एक बच्ची काे उसके परिजनाें के हवाले किया गया। सभी बच्चियाें के खाते में तय मुअावजे की राशि भी भेज दी गई है।

मोकामा व पटना से पहले चरण में 8 बच्चियाें काे घर भेजा गया

सुप्रीम काेर्ट ने बालिका गृह कांड की पीड़ित बच्चियाें काे उनके घर भेजने का अादेश सितंबर में दिया था। इसके बाद पटना में समाज कल्याण विभाग ने टिस, सीडब्लूजेसी के चेयरपर्सन अाैर सहायक निदेशक के साथ अभिभावकाें की बैठक बुलाई। अभिभावकाें द्वारा अपनी बच्चियाें काे घर ले जाने के लिए तैयार हाेने पर पहले चरण में 8 बच्चियाें काे उनके घर भेजा गया। ये बच्चियां मुजफ्फरपुर से माेकामा अाैर पटना शिफ्ट की गई थीं। इसके बाद अलग-अलग चरणाें में 19 बच्चियाें काे उनके घर भेज दिया गया है।

मुअावजे की राशि पीड़ित बच्चियाें के नाम पर एफडी की गई

बालिका गृह की पीड़ित सभी 44 बच्चियाें काे मुअावजे की राशि उनके खाते में भेज दी गई है। विभाग ने सभी बच्चियाें के नाम पर फिक्स डिपॉजिट कराई है। विभाग का मानना है कि बचत खाते में यदि मुअावजा की राशि जमा कराई जाती ताे वह खर्च हाे जाती। लेकिन, एफडी कराने से राशि में बढ़ाेतरी हाेगी। इससे बच्चियां मुख्यधारा से जुड़कर अपना जीवन-यापन कर सकेंगी।

बेटियों से हैवानियत पर बनेगी फिल्म

मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बेटियों से हुई हैवानियत पर फिल्म बनेगी। यहां आए युवा फिल्मकार राजन कुमार ने इस पर रिसर्च शुरू कर दिया है। इसके लिए वे घटना से जुड़े तथ्यों व दस्तावेजों की पड़ताल कर रहे हैं।मूल रूप से हाजीपुर के नखास चौक के रहने वाले राजन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि यह काल्पनिक कहानी होगी जो सच्ची घटनाओं से प्रेरित दिखलाई जाएगी। बताया कि फिल्म काे जर्मनी के बर्लिन में सितंबर-

अक्टूबर में हाेनेवाले ह्यूमन राइट फेस्टिवल में दिखाया जाएगा। 10 दिनाें तक चलनेवाले इस ह्यूमन राइट फेस्टिवल में देश-दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों का प्रदर्शन किया जाना है।

प्रतीकात्मक फोटो।


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