वन विभाग की देखरेख में संचालित संजय पार्क को विकसित करने के लिए हर साल लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यहां रखे गए हिरण और कोटरा को सही तरीके से भोजन नहीं मिल पा रहा है।
जबकि इनकी देखरेख पर 10 हजार रुपए रोजाना खर्च हो रहे हैं। कहने को तो विभाग के कर्मचारी जंगल से हर रोज हरे पत्ते लाते हैं और भूसा के साथ महुआ और दूसरे आहर दिए जा रहे हैं, लेकिन दैनिक भास्कर की टीम ने सोमवार की दोपहर में जाकर जायजा लिया तो भूखे ये जानवर पत्ता देने के बाद बचे हुए सूखे डंठलों को चबाते हुए नजर आ रहे थे।
वहीं एक- दो नाद में भूसा दिखाई दिया। संजय पार्क में इन दिनों 75 कोटरा और हिरण रखे गए हैं। हद तो यह है कि विभाग जहां एक ओर इनकी देखरेख में हर रोज करीब 10 हजार से अधिक का खर्च बताता है तो वहीं नागरिकों को भी इनके देखरेख के लिए पैसे देने के लिए गोद लेने का अभियान चलाया।
इसके तहत भी कुछ लोगों ने पैसे दिए, लेकिन इसके बाद भी विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों का रवैया इन जानवरों के प्रति सही नहीं है। बता दें कि पार्क प्रबंधन ने यहां के जानवरों को एक घेरा बनाकर उसके अंदर रखा है, घेरा के अंदर पहले एक नाला बहता था और बरसात के दिनों में यहां पानी भर जाता है, जिसे जानवर पीते हैं।
लेकिन का दावा है कि जानवरों के लिए बेड़ा के अंदर नल लगवाए गए हैं और नल का पानी नाद में भरा रहता है, जिसे जानवर पीते हैं और पानी को उपचारित करने के बाद दिया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि यहां 75 जानवरों के लिए तीन-चार नाद ही दिखाई दिए। यहां मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि जंगल में विचरण के बाद जिस तरह से जानवरों की सेहत रहती है, यहां नहीं रख पा रहे हैं।

إرسال تعليق