जयपुर (संजीव शर्मा/ सुरेन्द्र स्वामी).मिलावटियों पर कार्रवाई और रोकथाम के लिए प्रदेश सरकार ने दाे दिन पहले जारी बजट में स्टेट फूड ऑथरिटी बनाने की घोषणा की है। इसमें एक आईएएस अफसर को फूड कमिश्नर तैनात करने के अलावा हर जिले में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए लैब खोलने का प्रावधान भी है। लेकिन सरकार की यह घोषणा भी कोरे वादे से कम नहीं लगतीक्योंकि 2010 में फूड सेफ्टी एक्ट लागू होने के बाद से गठित फूड सेफ्टी ट्रिब्यूनल में रजिस्ट्रार का पद 8 माह से खाली चल रहा है।
यहां स्टेनो चरणसिंह को रजिस्ट्रार का चार्ज दे रखा है। उनके अलावा पीओ उमेश शर्मा ही ट्रिब्यूनल की कमान संभाल रहे हैं। फिलहाल ट्रिब्यूनल में पीओ व रजिस्ट्रार के अलावा दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही कार्यरत हैं। स्टॉफ नहीं होने के कारण लंबित केसों की संख्या भी बढ़कर दोगुनी हो गई है। ट्रिब्यनूल में लंबित केसों की सुनवाई नहीं होने से पक्षकारों को न्याय मिलने में देरी हो रही है।

पेंडिंग केस दोगुने हुए
  • 200 केस पेंडिंग जुलाई 2019 में
  • 454 पहुंच गए फरवरी 2020 में
फूड सेफ्टी ट्रिब्यूनल से मिलावट नहीं रुकी

ट्रिब्यूनल में रजिस्ट्रार का पद खाली चल रहा है। रजिस्ट्रार का चार्ज डेपुटेशन पर आए स्टेनो को दे रखा है। नियमानुसार रजिस्ट्रार के पद पर किसी कानूनी जानकार एएलआर या डीएलआर को नियुक्त किया जाना चाहिए। पीओ के अलावा रजिस्ट्रार, सीनियर पीए, स्टेनोग्राफर, रीडर, जूनियर अकाउंटेंट, यूडीसी व एलडीसी के पद स्वीकृत हैं, लेकिन अधिकतर खाली हैं। अभी पीओ व रजिस्ट्रार के अलावा दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही कार्यरत हैं।

स्टेट फूड अथॉरिटी से रुकने की क्या गारंटी

बजट घोषणा के स्टेट फूड ऑथरिटी की कमान फूड सेफ्टी कमिश्नर के तौर पर आईएएस अफसर संभालेंगे। राजस्थान देश का 29वां ऐसा राज्य बन जाएगा जहां पर आईएएस को यह कमान दी जाएगी। अभी चिकित्सा विभाग के निदेशक के पास इसका अतिरिक्त चार्ज है। {हर जिले में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए लैब व मौके पर जांच के लिए मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब का भी प्रावधान है। इसके अलावा मॉनिटरिंग के लिए अलग से टीम बनेगी। हेल्पलाइन नंबर जारी हाेंगे।मिलावट पर सीएमएचओ या अन्य अफसरों की कार्रवाई पर अगर अपील होती तो सारे फैसले स्टेट फूड ट्रिब्यूनल को देने थे। लेकिन ट्रिब्यूनल के भविष्य का फैसला सरकार ने अटका रखा है।


हाईकोर्ट ने कहा था- ट्रिब्यूनल को स्टाफ दें, आदेश ठंडे बस्ते में

ट्रिब्यूनल में पीओ को 19 फरवरी 2016 को नियुक्त किया था। लेकिन ट्रिब्यूनल में स्टॉफ सहित अन्य आधारभूत सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को ट्रिब्यूनल में आधारभूत सुविधाएं सहित स्टॉफ मुहैया कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अब तक स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है।



ट्रिब्यनूल में लंबित केसों की सुनवाई नहीं होने से पक्षकारों को न्याय मिलने में देरी हो रही है।



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