इंदौर.चंद्रयान-1 टीम के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर प्रो. राजमल जैन का कहना है सूर्य पर मौजूद काले धब्बे यानी सन स्पॉट्स की संख्या कम होती जा रही है। 1980 में इनकी संख्या 200 थी, जो 2016 में 114 ही रह गई है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2023 तक इनकी संख्या 100 से भी कम हो जाएगी। यदि धब्बों की संख्या कम होती रहेगी तो धरती के सामने ग्लोबल वॉर्मिंग की जगह ग्लोबल कूलिंग की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इसरो की फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी से रिटायर सीनियर प्रो. राजमल जैन ने ये बातें भास्कर से विशेष चर्चा में बताईं। वे राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर एक कार्यक्रम में शामिल होने शहर में थे।

खतरा... 4 डिग्री तक कम हो सकता है धरती का तापमान

धरती का तापमान 0.5 डिग्री बढ़ने से ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरा मंडरा रहा है जबकि सन स्पॉट्स कम होने से धरती का तापमान 4 डिग्री तक कम हो सकता है। नासा सहित दुनिया की सभी बड़ी एजेंसियां इस पर लगातार नजर रखे हुए हैं। उन्होंने बताया सूर्य पर मौजूद धब्बे दरअसल चुंबकीय क्षेत्र होते हैं। धरती का तापमान एक समान बनाए रखने के साथ ही वातावरण और बारिश भी इन पर निर्भर होती है। इनके बनने की प्रक्रिया में होने वाले परिवर्तन के कारण इनकी संख्या कम हो रही है।

विद्यासागरजी बोले- विज्ञान-इंजीनियरिंग की शिक्षा हिंदी में मिले

इंदौर आए प्रो. जैन ने आचार्य विद्यासागर जी से भी मुलाकात की। इस अवसर पर आचार्यश्री ने उन्हें विज्ञान और इंजीनियरिंग की शिक्षा हिंदी में उपलब्ध करवाने के लिए हिंदी विश्वविद्यालय का विचार दिया। प्रो. जैन ने बताया चूंकि मप्र हिंदी राज्य है, इसलिए भोपाल में इसे बनाने पर ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण छात्र विज्ञान की उच्च शिक्षा हिंदी में हासिल कर सकेंगे।



प्रो. राजमल जैन।



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